झुर्रियां कैसे हटाएं, और जो सच में काम करता है
आईने के सामने खड़े होकर आंख के कोने पर उंगली फेरते हुए यह सोचना कि यह महीन लकीर कब आ गई, एक बहुत आम अनुभव है। और जब यह लकीर पच्चीस या तीस की उम्र में दिखे, तो घबराहट और बढ़ जाती है। मन में तुरंत सवाल आता है, क्या मैं समय से पहले बूढ़ा दिख रहा हूं।
इसके साथ ही शुरू होती है नुस्खों की बाढ़। कोई कहता है फलां क्रीम लगाओ, कोई कहता है यह तेल मालिश करो, कोई महंगे treatment गिनाता है। इनमें से ज़्यादातर बातें या तो अधूरी होती हैं या सीधा झूठ।
यह गाइड आपके साथ सीधी रहेगी। हम समझेंगे कि झुर्रियां असल में बनती कैसे हैं, कम उम्र में क्यों आ जाती हैं, कौन सी आदतें उन्हें तेज़ी से बढ़ाती हैं, कौन से उपाय सच में मदद करते हैं और कौन से सिर्फ़ मिथक हैं, और कब समझ जाना चाहिए कि अब किसी expert की ज़रूरत है। रातों-रात झुर्रियां मिटा देने का वादा यहां नहीं मिलेगा, क्योंकि त्वचा ऐसे काम नहीं करती।
पहले समझें, झुर्रियां बनती कैसे हैं
हमारी त्वचा के अंदर दो चीज़ें उसे कसा हुआ और लचीला रखती हैं। एक है collagen, जो त्वचा को मज़बूती देता है, और दूसरा है elastin, जो उसे खिंचने के बाद वापस अपनी जगह लौटने की क्षमता देता है। जवान त्वचा में ये दोनों भरपूर मात्रा में होते हैं, इसलिए वह भरी-भरी और चिकनी दिखती है।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर इन दोनों को कम बनाता है। साथ ही त्वचा की ऊपरी परत पतली होती है और उसकी नमी बनाए रखने की ताकत घटती है। नतीजा यह होता है कि जहां-जहां चेहरा बार-बार मुड़ता है, यानी आंखों के कोने, माथा, और होंठों के आसपास, वहां पहले महीन रेखाएं और फिर गहरी झुर्रियां बन जाती हैं।
यहां असली बात यह है कि यह प्रक्रिया सबके साथ एक ही रफ्तार से नहीं होती। दो लोग एक ही उम्र के हो सकते हैं और उनकी त्वचा में सालों का फर्क दिख सकता है। यह फर्क genes से थोड़ा तय होता है, पर बहुत बड़ा हिस्सा रोज़ की आदतों से बनता है। और यही अच्छी खबर है, क्योंकि आदतें बदली जा सकती हैं।
कम उम्र में झुर्रियां आने के असली कारण
अगर बीस या तीस की उम्र में ही रेखाएं दिखने लगी हैं, तो आमतौर पर इनमें से कुछ वजहें साथ मिलकर काम कर रही होती हैं।
सबसे बड़ा कारण है धूप। सूरज की पराबैंगनी किरणें त्वचा के अंदर collagen के तंतुओं को तोड़ती हैं। भारत में जहां साल के ज़्यादातर महीने तेज़ धूप रहती है और लोग रोज़ घंटों बाहर बिताते हैं, वहां यह नुकसान बहुत जल्दी जुड़ता है। दिलचस्प बात यह है कि यह असर धीरे-धीरे जमा होता है, इसलिए बीस की उम्र में जो धूप लगी थी उसका नतीजा तीस की उम्र में दिखता है।
दूसरा बड़ा कारण है नींद की कमी। नींद वह समय है जब शरीर त्वचा समेत हर हिस्से की मरम्मत करता है। लगातार पांच या छह घंटे की अधूरी नींद लेने वालों में त्वचा बेजान, ढीली और थकी हुई दिखती है, और आंखों के नीचे की रेखाएं सबसे पहले उभरती हैं। अगर आपको रात में सोने में दिक्कत होती है, तो रात को नींद नहीं आती तो क्या करें वाली गाइड में बताए तरीके त्वचा के लिए भी उतने ही काम के हैं जितने दिमाग के लिए।
तीसरा कारण है शरीर में पानी की कमी। पानी कम होने पर त्वचा की ऊपरी परत सूख जाती है और महीन रेखाएं कहीं ज़्यादा साफ़ दिखने लगती हैं। यह वह बदलाव है जो सबसे जल्दी सुधर भी सकता है। पानी पीने के फायदे वाली गाइड में बताया गया है कि दिन भर में कितना और कब पानी पीना असल में समझदारी है।
चौथा कारण है धूम्रपान। सिगरेट का धुआं त्वचा तक पहुंचने वाले खून के बहाव को कम करता है और collagen को सीधा नुकसान पहुंचाता है। इसीलिए लंबे समय से धूम्रपान करने वालों के होंठों के आसपास और आंखों के कोनों पर रेखाएं औरों से जल्दी दिखती हैं। अगर आप यह आदत छोड़ने की सोच रहे हैं, तो सिगरेट कैसे छोड़ें वाली गाइड में व्यावहारिक तरीके दिए गए हैं, और त्वचा उन शुरुआती जगहों में से है जहां सुधार दिखता है।
पांचवां कारण है लंबे समय का तनाव। तनाव शरीर में ऐसे बदलाव लाता है जो त्वचा की मरम्मत की क्षमता घटाते हैं, और तनाव में लोग अक्सर माथा सिकोड़ते या जबड़ा भींचते रहते हैं, जिससे उन्हीं जगहों पर रेखाएं गहरी होती हैं। तनाव कम करने के उपाय यहां सीधे मदद करते हैं।
छठा कारण खानपान है। जिस खाने में सब्ज़ियां, फल और पर्याप्त protein नहीं है, वहां त्वचा को मरम्मत का कच्चा माल ही नहीं मिलता। बहुत ज़्यादा चीनी और बहुत ज़्यादा तला हुआ खाना लंबे समय में त्वचा की सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता।
और सातवां, जो अक्सर हैरान करता है, वह है बार-बार चेहरे को खींचना या रगड़ना। तेज़ हाथ से चेहरा पोंछना, आंख मलना, बहुत रगड़कर scrub करना, यह सब उन जगहों की पतली त्वचा को थका देता है।