सर्दी आते ही या कई बार बिना किसी साफ़ वजह के, त्वचा अचानक खिंची-खिंची लगने लगती है। नहाने के बाद शरीर पर सफेद लकीरें दिखती हैं, चेहरा धोते ही कसाव महसूस होता है, हाथों की त्वचा खुरदरी हो जाती है और रात में खुजली परेशान करती है। ज़्यादातर लोग इसका जवाब बाज़ार में ढूंढते हैं, एक के बाद एक क्रीम बदलते रहते हैं, और फिर भी हालत वहीं की वहीं रहती है।
सच्चाई यह है कि रूखी त्वचा का असली इलाज किसी एक जादुई चीज़ में नहीं, बल्कि रोज़ की दो-तीन आदतों में छिपा है। इस गाइड में हम बिना किसी बड़े दावे के यह समझेंगे कि त्वचा रूखी होती क्यों है, कौन सी आम आदत सबसे ज़्यादा नुकसान कर रही है, रसोई की कौन सी चीज़ें सच में मदद करती हैं, कौन सी उल्टा नुकसान करती हैं, और किन हालात में घरेलू उपाय छोड़कर डॉक्टर के पास जाना ज़रूरी है।
रूखी त्वचा असल में होती क्या है
हमारी त्वचा की सबसे ऊपरी परत को एक दीवार की तरह समझिए। इसमें त्वचा की कोशिकाएं ईंटों की तरह हैं और उनके बीच का प्राकृतिक तेल और वसा गारे की तरह। यही गारा दो काम करता है, बाहर की धूल, गंदगी और जलन पैदा करने वाली चीज़ों को अंदर आने से रोकता है, और अंदर की नमी को बाहर उड़ने से बचाता है।
जब यह गारा कमज़ोर पड़ता है, तो नमी तेज़ी से उड़ने लगती है और त्वचा रूखी, खुरदरी और खिंची हुई महसूस होती है। यही वजह है कि रूखी त्वचा में खुजली भी ज़्यादा होती है और थोड़ी सी भी तेज़ चीज़ लगते ही जलन होने लगती है। कमज़ोर दीवार में हर चीज़ चुभती है।
इसका सीधा मतलब यह है कि रूखेपन का इलाज सिर्फ़ त्वचा को गीला करना नहीं, बल्कि इस दीवार को दोबारा मज़बूत होने देना है। और दीवार तब बनती है जब हम उसे रोज़ तोड़ना बंद करें। इसीलिए सबसे बड़ा सुधार अक्सर कुछ नया लगाने से नहीं, बल्कि कुछ पुराना करना छोड़ने से आता है।
रूखेपन के सबसे आम कारण
बहुत गर्म पानी से लंबा नहाना। ठंड में गर्म पानी अच्छा लगता है, पर तेज़ गर्म पानी त्वचा का प्राकृतिक तेल सबसे तेज़ी से घोलकर बहा देता है। बीस मिनट की गर्म बाल्टी के बाद त्वचा में जो कसाव महसूस होता है, वह उसी तेल के जाने का संकेत है।
तेज़ साबुन और बार-बार सफाई। जो साबुन ज़्यादा झाग बनाता है और नहाने के बाद त्वचा को "एकदम साफ़" यानी खिंचा हुआ छोड़ता है, वह अक्सर रूखेपन का बड़ा कारण होता है। दिन में कई बार तेज़ फेसवॉश या हैंडवॉश इस्तेमाल करना भी वही करता है।
मौसम और हवा। सर्दियों की सूखी हवा, तेज़ धूप, और लगातार AC या हीटर वाले कमरे में रहना, ये सब हवा में नमी घटाकर त्वचा से पानी खींचते हैं। बहुत से लोगों की त्वचा गर्मियों में भी सिर्फ़ इसलिए रूखी रहती है क्योंकि वे दिन भर AC में बैठते हैं।
उम्र और शरीर के बदलाव। उम्र बढ़ने के साथ त्वचा की तेल ग्रंथियां धीमी होती हैं, इसलिए वही देखभाल जो बीस की उम्र में काफ़ी थी, चालीस के बाद कम पड़ सकती है। रूखापन आगे चलकर त्वचा को ढीला और महीन रेखाओं को गहरा भी दिखा सकता है, इस पर हमने अलग से झुर्रियां कैसे हटाएं वाली गाइड में विस्तार से लिखा है।
पानी और खान-पान की कमी। दिन भर बहुत कम पानी पीना, बहुत ज़्यादा चाय और कॉफ़ी, और खाने में अच्छी वसा यानी नट्स, बीज और तेल की कमी, ये सब त्वचा को भीतर से कमज़ोर सहारा देते हैं।
कुछ अंदरूनी वजहें। कुछ मामलों में लगातार बना रहने वाला रूखापन थायरॉइड, त्वचा की किसी स्थिति या दूसरी अंदरूनी वजह का संकेत हो सकता है। इसका पता अंदाज़े से नहीं, जांच से चलता है, इसीलिए लंबे समय तक न सुधरने वाले रूखेपन को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
नहाने का तरीका बदलिए, आधा काम वहीं हो जाएगा
अगर इस पूरे लेख से आप सिर्फ़ एक चीज़ अपनाएं, तो यह होनी चाहिए। ज़्यादातर लोगों की रूखी त्वचा उनके बाथरूम में बनती है।
पानी गुनगुना रखें, तेज़ गर्म नहीं। नहाने का समय दस से पंद्रह मिनट के भीतर रखें। तेज़ झाग वाले साबुन की जगह कोई सौम्य, बिना तेज़ खुशबू वाला विकल्प चुनें और उसे पूरे शरीर पर रगड़ने के बजाय सिर्फ़ पसीने वाली जगहों पर इस्तेमाल करें। बाकी शरीर के लिए सादा पानी अक्सर काफ़ी होता है।
नहाने के बाद तौलिये से ज़ोर से रगड़ें नहीं। हल्के से थपथपाकर पानी सोखें, ताकि त्वचा हल्की नम रहे। और अगले दो से तीन मिनट के भीतर मॉइस्चराइज़र या तेल लगा लें। यही वह छोटी सी बात है जो अकेले सबसे बड़ा फर्क करती है, क्योंकि आप त्वचा में बची हुई नमी को अंदर सील कर रहे होते हैं। सूखी त्वचा पर लगाया गया वही मॉइस्चराइज़र आधा काम ही करता है।
यही नियम चेहरे और हाथों पर भी लागू होता है। हर बार हाथ धोने के बाद, खासकर सर्दियों में, थोड़ा सा मॉइस्चराइज़र लगा लेना पूरे दिन के रूखेपन को रोक देता है।
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