हार्मोनल इम्बैलेंस के लक्षण और उपाय: कारण, डाइट और कब डॉक्टर से मिलें
छोटा जवाब
हार्मोन शरीर के भीतर चलने वाले संदेश हैं, जो नींद, भूख, वजन, मूड, त्वचा, बाल और प्रजनन तंत्र, सबको आपस में जोड़कर चलाते हैं। जब इनमें से किसी का स्तर या समय गड़बड़ाता है, तो असर एक जगह नहीं बल्कि कई जगह एक साथ दिखता है, और यही हार्मोनल इम्बैलेंस की सबसे पहचानने लायक निशानी है। ज़्यादातर मामलों में इसकी जड़ किसी दुर्लभ बीमारी में नहीं, बल्कि चार आम चीज़ों में होती है: लगातार खराब नींद, लंबा तनाव, इंसुलिन से जुड़ी गड़बड़ी और बहुत कम या बहुत असंतुलित खानपान। इन्हें सुधारने से कई लोगों को कुछ महीनों में साफ फर्क मिलता है। लेकिन थायराइड जैसी स्थितियों में जांच और इलाज ज़रूरी है, इसलिए लक्षण लगातार बने रहें तो अंदाज़ा लगाने के बजाय डॉक्टर से मिलना ही सही रास्ता है।
ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी और जीवनशैली से जुड़े सुझावों के लिए है और किसी भी तरह से चिकित्सकीय सलाह, निदान या इलाज का विकल्प नहीं है। हार्मोन से जुड़ी कई स्थितियों की पहचान सिर्फ जांच से होती है, और उनका इलाज हर व्यक्ति में अलग होता है। कृपया किसी भी दवा या सप्लीमेंट को अपने आप शुरू या बंद न करें, और लगातार बने रहने वाले लक्षणों के लिए योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।
हार्मोनल इम्बैलेंस होता क्या है
शरीर में कई ग्रंथियां हैं जो खून में बहुत छोटी मात्रा में रसायन छोड़ती हैं। ये रसायन दूर बैठे अंगों तक पहुंचकर उन्हें बताते हैं कि क्या करना है। थायराइड से निकलने वाला हार्मोन तय करता है कि शरीर ऊर्जा कितनी तेज़ी से खर्च करेगा। इंसुलिन तय करता है कि खाने से मिली शुगर कोशिकाओं तक कैसे पहुंचेगी। तनाव वाला हार्मोन तय करता है कि शरीर कब सतर्क रहेगा। और प्रजनन से जुड़े हार्मोन महिलाओं में चक्र और पुरुषों में मांसपेशी, ऊर्जा और मूड को प्रभावित करते हैं।
अहम बात यह है कि ये सब एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। ये अलग अलग स्विच नहीं, बल्कि एक ही ऑर्केस्ट्रा के वाद्य हैं। इसलिए जब एक बिगड़ता है तो अकेला नहीं बिगड़ता। नींद खराब होने पर भूख वाले हार्मोन गड़बड़ाते हैं, उससे मीठे की तलब बढ़ती है, उससे ब्लड शुगर के झटके आते हैं, और वह आगे चलकर वजन और मूड दोनों पर असर डालता है।
इसीलिए हार्मोनल इम्बैलेंस को किसी एक लक्षण से पहचानने की कोशिश गलत रास्ता है। सही सवाल यह है कि क्या कई सिस्टम एक साथ गड़बड़ लग रहे हैं, और क्या यह कई हफ्तों से चल रहा है।
लक्षण जिन पर ध्यान देना चाहिए
सबमें दिखने वाले आम संकेत
- बिना बड़ी वजह के वजन बढ़ना या घटना, खासकर जब खानपान वैसा ही हो
- लगातार थकान, जो पूरी नींद के बाद भी बनी रहे
- नींद का बार बार टूटना या देर तक नींद न आना
- मूड में तेज़ उतार चढ़ाव, चिड़चिड़ापन या बिना वजह उदासी
- बालों का ज़्यादा झड़ना या उनका पतला होते जाना
- त्वचा में बदलाव, जैसे लगातार मुंहासे, बहुत रूखापन या गर्दन के पीछे कालापन
- मीठे की बार बार तलब और खाने के थोड़ी देर बाद फिर भूख लगना
- ठंड या गर्मी बर्दाश्त न होना, जो पहले नहीं थी
महिलाओं में खास संकेत
- पीरियड्स का अनियमित होना, बहुत हल्का होना या महीनों रुक जाना
- चेहरे, ठोड़ी या पेट पर अनचाहे बाल आना
- पेट के आसपास वजन का जमा होना जो कम नहीं हो रहा
- गर्भधारण में कठिनाई
- पीरियड्स से पहले लक्षणों का बहुत तेज़ हो जाना
पुरुषों में खास संकेत
- ऊर्जा और सहनशक्ति में लगातार गिरावट
- मांसपेशियों का घटना, जबकि कसरत वैसी ही हो
- मन का उदास या उदासीन रहना
- नींद की गुणवत्ता बिगड़ना और सुबह ताज़गी न महसूस होना
एक बात साफ रखिए। ऊपर की लगभग हर चीज़ किसी और वजह से भी हो सकती है, जैसे खून की कमी, विटामिन की कमी, बहुत ज़्यादा काम, या बस लंबे समय से खराब नींद। इसलिए इस सूची को खुद पर लेबल लगाने के लिए नहीं, बल्कि यह तय करने के लिए इस्तेमाल कीजिए कि डॉक्टर से बात करने का समय आ गया है या नहीं।
सबसे आम कारण
नींद की लगातार कमी। यह सबसे कम आंका जाने वाला कारण है। नींद के दौरान ही शरीर कई हार्मोन का संतुलन दोबारा बनाता है। लगातार छह घंटे से कम सोने पर भूख बढ़ाने वाला हार्मोन ऊपर और पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन नीचे चला जाता है, और इंसुलिन का काम भी कमज़ोर पड़ता है। नींद और वजन का यह रिश्ता समझने के लिए रात को नींद नहीं आती तो क्या करें पूरा रूटीन देता है।
लंबा चलने वाला तनाव। थोड़े समय का तनाव उपयोगी है, पर महीनों तक बना रहने वाला दबाव तनाव हार्मोन को लगातार ऊंचा रखता है, जो नींद, पाचन, ब्लड शुगर और महिलाओं में चक्र, सब पर असर डालता है।
इंसुलिन से जुड़ी गड़बड़ी। जब खाना ज़्यादातर मैदे, चीनी और तली चीज़ों से बनता है और शारीरिक गतिविधि कम होती है, तो शरीर को उतनी ही शुगर संभालने के लिए ज़्यादा इंसुलिन बनाना पड़ता है। यही स्थिति महिलाओं में पीसीओएस के कई लक्षणों से जुड़ी होती है।
थायराइड की गड़बड़ी। भारत में यह आम है और इसके लक्षण, थकान, वजन में बदलाव, बाल झड़ना, अक्सर दूसरी वजहों के खाते में डाल दिए जाते हैं। इसे सिर्फ जांच से पकड़ा जा सकता है। थायराइड और वजन के रिश्ते पर हमारा विस्तृत गाइड थायराइड में वजन कैसे कम करें पढ़ने लायक है।
बहुत कम खाना या बहुत ज़्यादा कसरत। यह उल्टा लग सकता है, पर शरीर को लंबे समय तक बहुत कम ऊर्जा मिलने पर वह प्रजनन और मेटाबॉलिज़्म से जुड़े कामों को धीमा कर देता है। तेज़ वजन घटाने की कोशिश हार्मोन बिगड़ने का काफी आम कारण है।
जीवन के प्राकृतिक पड़ाव। किशोरावस्था, गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद का समय और मेनोपॉज़ के आसपास के साल, इन सबमें हार्मोन स्वाभाविक रूप से बदलते हैं। यह गड़बड़ी नहीं, बदलाव है, हालांकि लक्षण असहज हो सकते हैं।